| पुण्यफलदायी अक्षय तृतीया |
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इस दिन का विशेष महत्त्व होने का कारण :- पुराणों में भविष्य पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही सत्युग एवं त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। भगवान विष्णु के 24 अवतारों में भगवान परशुराम, नर-नारायण एवं हयग्रीव आदि तीन अवतार अक्षय तृतीया के दिन ही इस पृथ्वी पर आए। अक्षय तृतीया के दिन ही माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था | भगवान् परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ थाद्रोपदी को चीरहरण से भगवान श्री कृष्णजी ने आज ही के दिन बचाया था ।कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ थाकुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है ।बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है ।अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।ज्योतिष शास्त्रानुसार अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है अक्षय तृतीया के दिन क्या करना शुभ है
इस दिन समस्त शुभ कार्य करने का विधान है। इस दिन प्रमुख रूप से स्वर्ण आभूषण या आवश्यकता के अन्य वस्तु जैसे कंप्यूटर, मोबाइल, फ्रिज,गाड़ी आदि खरीदना चाहिए। इस दिन भूमि पूजन, गृह प्रवेश, पदभार ग्रहण या कोई नया व्यापार प्रारंभ करना चाहिए। श्री विष्णु भगवान की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। होम-हवन, जप एवं दान करने के बाद पितृतर्पण करना चाहिए। जहाँ तिल सात्त्विकता का प्रतीक है वहीं जल शुद्ध भाव का प्रतीक है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि, इस दिन बिना पिंड दिए विधिपूर्वक ब्राह्मण भोजन के रूप में श्राद्ध कर्म करना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो कम से कम तिल तर्पण अवश्य ही करना चाहिए। दान में कलश, पंखा, खड़ाऊ, सत्तू, ककडी,इत्यादि फल, शक्कर आदि दान भी करनी चाहिए। इस दिन छाता का दान अत्यंत शुभ होता है।
स्त्रियोंके लिए यह दिन अति महत्त्वपूर्ण होता है। चैत्र मास में स्थापित चैत्रगौरी का इस दिन विसर्जन किया जाता है। इस कारण स्त्रियां इस दिन हल्दी-कुमकुम (हल्दी-कुमकुम एक रिवाज है, जिसमें सुहागिन स्त्रियां अपने घरमें अन्य सुहागिनों को बुलाती है तथा उन्हें देवीका रूप मानकर, उन्हें हल्दी-कुमकुम लगाकर तदुपरांत चरण स्पर्श करके उपहार देती है) करती है।
क्या दान करे इस दिन :-
छतरी व जूते का दान- इस शुभ पर्व पर छतरी व जूतों का दान आपके जीवन से आर्थिक बाधाओं को समाप्त करता है।
छाछ का दान- इस दिन छाछ का दान करने से आपकी धन-संपति तथा ज्ञान में वृद्धि होती है।
ग़रीब व जरूरतमंदों को वस्त्र दान- ग़रीब व जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, भौतिक और आध्यात्मिक आशीर्वाद प्राप्त करने की कुंजी है। अक्षय तृतीया पर दान करने से महान लाभ और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
पुस्तिका , कलम व फलों का दान- प्रजनन शक्ति व धन की देवी का अक्षय आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आप फलों, पुस्तिकाओं व कलम का दान करके प्राप्त कर सकते हैं।
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पुण्यफलदायी अक्षय तृतीया
रविवार, 22 अप्रैल 2012
पुण्यफलदायी अक्षय तृतीया
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